Dr. B.R. Ambedkar

ALL INDIA SAMATA SAINIK DAL

FOUNDER – BODHISATTVA DR. BABASAHEB AMBEDKAR @ MARCH 13, 1927

H.O. – 32 Untkhana, Baidyanath Chauk, Medical College Road, Nagpur 440009 (Maharashtra)

Dr. B.R. Ambedkar

ALL INDIA SAMATA SAINIK DAL

FOUNDER – BODHISATTVA DR. BABASAHEB AMBEDKAR @ MARCH 13, 1927

GENERAL INFORMATION

Heading
Content
Name of Institution / Organization
All India Samata Sainik Dal
Central Office of the Institution /Organization
32, Untkhana, Baidhnath Chowk, Medical College Road, Nagpur-440024 (Maharashtra)
Registration Number of Institution / Organization :
F-7471 &344 / 88 ( Nagpur )
Main Training Centre
Samata Bhawan, Samata Bhoomi, Near Shantivan, Kalmeshwar Road, Chicholi (Fetari), District - Nagpur 441502
Area of Operation:
Will be in all the states and union teritories of the country

भारतीय संविधान के निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव आम्बेडकर ने महाड़ तालाब आंदोलन के मद्देनजर रविवार दिनाँक 13 मार्च 1927 को मुंबई में सुबेदार सबादकर को साथ में लेकर ‘समता सैनिक दल’ के नाम से एक सामाजिक संगठन का गठन किया था । कालांतर में इस संगठन ने ऑल इंडिया समता सैनिक दल का रूप धारण कर लिया । ऑल इंडिया समता सैनिक दल ने आम्बेडकरी आंदोलन में अपनी अहम भूमिका निभाई है, चाहे वह 1927 के महाड़ तालाब के दोनों आंदोलन हो , मनुस्मृति दहन हो, 1930 का कालाराम मंदिर प्रवेश आंदोलन हो, 1932 का पूना पैक्ट हो, 1937 का बंबई विधान मंडल का निर्वाचन हो, 1956 का नागपुर का धम्मदीक्षा कार्यक्रम हो या बाबासाहेब के महापरिनिर्वाण की व्यवस्था हो ।

समता सैनिक दल का संविधान – 30 जनवरी 1944 को सम्पन्न ऑल इंडिया समता सैनिक दल के द्वितीय अधिवेशन में गठित संविधान समिति द्वारा संविधान का प्रारूप तैयार करने के बाद डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रारूप का अवलोकन एवं जाँच करने के बाद दल के संविघान को अंतिम रूप दिया गया। इस संविधान के उद्देश्य पढ़ने से हमें पता चलता है कि बाबासाहेब समता सैनिक दल के माध्यम से वंश, धर्म, जाति, लिंग एवं वर्ग पर आधारित सभी प्रकार की विषमता को नष्ट करके स्वंतत्रता, समानता, भाईचारा एवं न्याय पर आधारित समाज का नव निर्माण करना चाहते थे।

डॉ. आम्बेडकर के पश्चात समता सैनिक दल – बाबासहेब डॉ. आम्बेडकर के महापरिनिर्वाण (6 दिसम्बर 1956) के पश्चात समता सैनिक दल कमजोर पड़ने से शोषितों एवं महिलाओं पर अन्याय, अत्याचार बढ़ने लगे और 1978 आते आते समता सैनिक दल के सभी गुटों की गतिविधियाँ थम सी गई एवं फिर से समाज में अन्याय, अत्याचार बढ़ने लगे। इस परिस्थिति को भाँपकर बाबासाहेब डॉ. आम्बेडकर के साथ दल में कार्य कर चुके नागपुर के कुछ वरिष्ठ निष्ठावान सैनिकों ने किसी भी गुट में शामिल न होकर बाबासाहेब के मूल संगठन को जिंदा रखना बेहतर समझा । और 22 सितम्बर 1977 को मिलिंद बुद्धविहार रामबाग नागपुर में बैठक आयोजित कर ऑल इंडिया समता सैनिक दल का पुनर्गठन करने का निर्णय लिया तथा दिनाँक 25 एवं 26 जनवरी 1978 को ईश्वर देशमुख शारीरिक शिक्षण महाविद्यालय क्रिडा चौक नागपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित कर ऑल इंडिया समता सैनिक दल का पुनर्गठन करके इसे पूर्णतः गैर राजनैतिक संगठन के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव पारित किया । इस अधिवेशन में संपूर्ण देश के कई बरिष्ठ आम्बेडकरी निष्ठावान सैनिकों ने दल को मजबूती प्रदान करने का आश्वासन दिया तथा स्मृतिशेष एड. भगवानदास एवं मान. एल.आर. बाली जी के अथक प्रयासों से सन्‌ 4983 आते आते ऑल इंडिया समता सैनिक दल की शाखायें संपूर्ण भारत के कोने कोने में स्थापित होने लगी और ऑल इंडिया समता सैनिक दल को स्थायित्व प्रदान करने के लिये वर्ष 1988 में इसे अखिल भारतीय स्तर पर रजिस्टर्ड किया गया ।